मैं रत्नाकर
गुरुवार, मई 26, 2011
कुछ यूं ही आया ख्याल
अशआर मेरे नमक की तासीर लिए हैं
प्यास का हो इंतज़ाम तो ही जुबां पे रखना
1 टिप्पणी:
अर्यमन चेतस पाण्डेय
6/23/2011 6:49 am
muqarrar..!!
:)
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muqarrar..!!
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